अहिंसा,संयम और तप के विलक्षण प्रयोग से आत्मा भावित होना तय – मुनि प्रसन्न कुमार “जनभावना भक्ति प्रबल हो तो अनहोनी भी होनी में बदल जाती है भाग्य,पुरुषार्थ और नियति में पुरुषार्थ प्रबल होने से पुरुषार्थ की विजय हुई तथा चातुर्मास मिलने की निराशा आशा में बदल गई । चातुर्मास में साधु साध्वियो के प्रवास […]
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