लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में इस्तीफों का दौर जारी है. अब कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी. लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी भी कांग्रेस पद से इस्तीफा दे चुके हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए ट्वीट किया, जनादेश स्वीकार करते हुए और हार की जिम्मेदारी लेते हुए मैंने राहुल गांधी को कांग्रेस महासचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मैं उन्हें (राहुल गांधी) इस जिम्मेदारी को सौंपने के लिए और मुझे पार्टी की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी. इन चुनावों में सबसे खास बात थी कि कांग्रेस के दिग्गज नेता भी अपनी सीट हार गए थे. ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी मध्य प्रदेश की गुना सीट से हार का सामना करना पड़ा था. भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की कुल 29 सीटों में से 28 सीटें झटककर कांग्रेस को हैरान कर दिया था. गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले चार बार से जीतते आ रहे थे. इस सीट को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था. मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी के केपी यादव ने 1,25,549 वोटों से मात दी थी. इस सीट पर छठे चरण में 12 मई को वोटिंग हुई थी, जिसमें क्षेत्र के कुल 16,74,676 वोटरों में से 70.02 फीसदी ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इससे पहले मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाने का सुझाव दिया है जो राज्य कांग्रेस का नेतृत्व करेगी. राहुल गांधी ने भी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. 21 साल बाद कांग्रेस की कमान एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार से बाहर किसी और नेता के हाथ में होगी. इंदिरा और राजीव के बाद 'गांधी परिवार' से सोनिया गांधी 1998 में अध्यक्ष बनीं और 2017 तक इस पद पर रहीं. इस दौरान कांग्रेस 10 साल तक केंद्र की सत्ता पर काबिज रही. सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की ताजपोशी दिसंबर, 2017 में हुई थी. हालांकि राहुल गांधी ने 2004 में राजनीतिक एंट्री की थी और 2007 में राष्ट्रीय महासचिव बने और बाद में उपाध्यक्ष के पद रहे. इस दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन को नई धार देने के लिए लिंगदोह कमेटी के तर्ज पर खड़ा करने की कोशिश की थी. इसके अलावा कई प्रत्याशियों के लिए कई राजनीतिक प्रयोग किए थे, जिनमें वह सफल नहीं हो सके.
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