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Friday, July 24, 2026 4:14:21 AM

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बहराइच। कस्तूरबा विद्यालयांे मंे गरीबों की पुत्रियाँ, प्राप्तकर रही है गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा

बहराइच। कस्तूरबा विद्यालयांे मंे गरीबों की पुत्रियाँ, प्राप्तकर रही है गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा

बहराइच। सर्व शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार ने दूरस्त एवं पिछडे़ क्षेत्रों के अनुसूचित जाति, अनु0 जनजाति पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यकों एवं गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय का संचालन किया है। बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं योजना को सार्थक करने के लिए केन्द्र सरकार ने कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक की पढ़ाई कराने का प्रावधान किया है। जो पहले कक्षा 6 से 8 तक ही संचालित होती थी। भारत सरकार सभी को शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं महिलाओं के शिक्षित होने पर दो परिवार सुधरते है। महिलाओं की शिक्षा से उनके जीवन स्तर, परिवार, समाज और देश में सुधार आता है। निरक्षर महिला होने से सामान्यता उच्च मातृत्व मृत्युदर, निम्न पोषाहार स्तर, न्यून आय अर्जन क्षमता और परिवार में उन्हें कम स्वायतता प्राप्त होती है। निरक्षर होने पर महिलाओं को कई तरह की अज्ञानता रहती है। उनके बच्चों पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए केन्द्र सरकार हर स्तर पर महिलाओं की शिक्षा के लिए व्यवस्था की है। जिन क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा व्यवस्था न होने पर वे शिक्षा नहीं प्राप्त कर सकतीं ऐसे ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी अवासीय विद्यालय खोलकर उन्हें शिक्षा दी जा रही है। देश मंे महिलाओं की साक्षरता दर पुरूषों की अपेक्षा कम है। देश में कई ऐसे क्षेत्र थे जहाँ बालिकाओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। गरीबी के कारण अक्सर गरीबों की पुत्रियां शिक्षा से वंचित रह जाती थी। महिला शिक्षा पर भारत सरकार ने जोर दिया है। इस विद्यालय का उद्देश्य है कि शिक्षा की दृष्टि से वंचित तबकांे की बालिकाओं को शिक्षा के अवसर प्रदान किया जाय। बालक और बालिका के बीच शिक्षा के अन्तर को समाप्त करते हुए बालिका शिक्षा को बराबरी केे स्तर पर लाया जाये। जो बालिकाये पिछड़ेपन, गरीबी के कारण शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाती उन्हें आवासीय सुविधा सहित निःशुल्क शिक्षा देकर साक्षर बनाया जाये। इन विद्यालयों के माध्यम से सामाजिक आर्थिक, शैैक्षणिक रूप से पिछड़े, पिछड़े वर्गो, अनुसूचित जाति/जनजाति अल्पसंख्यकों, गरीबों की बालिका को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दी जाती है। कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालयों में शिक्षा से वंचित ग्रामीण क्षेत्र की 10 वर्ष से 14 वर्ष की आयु की बालिकाओं का प्रवेश दिया जाता है। इन विद्यालयों में 75 प्रतिवर्ष ग्रामीण क्षेत्र की अनुसूचित जाति/जनजाति अत्यन्त पिछड़ी जाति तथा अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं, तथा 25 प्रतिशत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बच्चियों का प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को आवास सहित समस्त आधारभूत सुविधायंे प्रदान की जाती है। विद्यालयों में शिक्षण-प्रवीणता सामग्री सहित समस्त सुविधायें निःशुल्क दी जाती है। इन विद्यालयों में छात्राओं को विभिन्न प्रकार के कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सके। उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय के अन्तर्गत 746 विद्यालय संचालित किये जा रहे है। इन विद्यालयों में 72074 छात्राये अधिवासित होकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रही है। प्रदेश सरकार इन विद्यालयों को माॅडल स्कूल के रूप में विकसित कर रही है। प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में यहाॅ पढ़ रही बालिकाओं को पाक्सो एक्ट, बाल शिक्षा अधिकारों जैसी आवश्यक कानूनी जानकारी भी दे रही है।

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