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Tuesday, October 20, 2026 5:08:55 AM

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क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

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क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

रिपोर्ट : राजेंद्र शर्मा बेशक, यह कहना तो शायद बहुत जल्दबाजी होगी कि बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण या एसआइआर की घोषणा के बाद से विपक्षी पार्टियों ही नहीं, बल्कि सामाजिक व जनतांत्रिक अधिकार संगठनों द्वारा भी ”वोट की चोरी” के जरिए चुनाव में हेरा-फेरी की जो आशंकाएं जतायी जा रही थीं और जनता के […]

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क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

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क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

रिपोर्ट : राजेंद्र शर्मा बेशक, यह कहना तो शायद बहुत जल्दबाजी होगी कि बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण या एसआइआर की घोषणा के बाद से विपक्षी पार्टियों ही नहीं, बल्कि सामाजिक व जनतांत्रिक अधिकार संगठनों द्वारा भी ”वोट की चोरी” के जरिए चुनाव में हेरा-फेरी की जो आशंकाएं जतायी जा रही थीं और जनता के […]

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श्रीमान भागवत की पहेलियाँ

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श्रीमान भागवत की पहेलियाँ

रिपोर्ट : सवेरा अनुवाद: संजय पराते दोहरेपन का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने तीन दिन (26-28 अगस्त, 2025) अपने संगठन को एक राष्ट्रवादी, उदार, समावेशी और अहिंसक संगठन के रूप में प्रस्तुत करने के दृष्टिकोण से बिताए, जो केवल यही चाहता है कि भारत पूरी मानवता को शांति और समृद्धि के […]

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क्या भारत का लोकतंत्र अब ‘नियंत्रित लोकतंत्र’ में बदल गया है?

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क्या भारत का लोकतंत्र अब ‘नियंत्रित लोकतंत्र’ में बदल गया है?

रिपोर्ट  : कृष्ण प्रताप सिंह अंदेशे तो पहले से जताए जा रहे थे, लेकिन अब देश के चुनाव आयोग ने जिस तरह सारी लोकलाज (जिसे लोकतांत्रिक बर्ताव का सबसे जरूरी तत्व बताया जाता है) बिसराकर अपनी (अ)विश्वसनीयता से जुड़े सारे सवालों की जवाबदेही की ओर पीठ कर ली, साथ ही चोर के कोतवाल को डांटने […]

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नागरिक परिक्रमा

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नागरिक परिक्रमा

संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां 1. जस्टिस नागरत्ना की असहमति पर गौर करना जरूरी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विपुल एम. पंचोली को शीर्ष न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश की है।कॉलेजियम ने न्यायाधीश पंचोली को पदोन्नत करने की […]

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ट्रंप का टैरिफ युद्ध और अंदर-बाहर बैसाखियों पर टिकी मोदी सरकार!

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ट्रंप का टैरिफ युद्ध और अंदर-बाहर बैसाखियों पर टिकी मोदी सरकार!

रिपोर्ट : संजय पराते ट्रंप के साथ यारी के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितनी ही शेखी क्यों न मार लें, भारत के साथ ट्रंप का टैरिफ युद्ध ही हकीकत है। यारी-दोस्ती के किस्से फ़साने हो चुके हैं। यह युद्ध कितना मारक है, इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारतीय बाजार […]

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धर्मस्थला में दबे सत्य और न्याय को उजागर करना जरूरी

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धर्मस्थला में दबे सत्य और न्याय को उजागर करना जरूरी

रिपोर्ट  : के एस विमला अनुवादक : संजय पराते हरे-भरे जंगलों और धीमी-धीमी बहती जलधाराओं से घिरा, और चूंकि यह बरसात का मौसम है — बहते पानी का तेज़ खिंचाव, बारिश की पुकार करते मोर और तोतों की चहचहाहट ; यह एक ऐसी जगह है, जो मन को प्रसन्न करती है। लेकिन यहाँ दुःख भारी […]

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शिक्षा : दो विरोधी परिप्रेक्ष्य – कम्युनिस्ट और आरएसएस

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शिक्षा : दो विरोधी परिप्रेक्ष्य – कम्युनिस्ट और आरएसएस

रिपोर्ट  : राजेंद्र शर्मा   भारत में कम्युनिस्ट अपने कार्य क्षेत्रों में स्कूल और कालेज स्थापित करने के लिए अक्सर सार्वजनिक चंदे करते और सार्वजनिक प्रयास करते आए हैं। बेशक, यह आरएसएस जैसे फासिस्ट संगठनों द्वारा बच्चों के लिए स्कूल स्थापित किए जाने की गतिविधि से पूरी तरह से अलग था।   अव्वल तो कम्युनिस्टों […]

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थेथरई अनलिमिटेड

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थेथरई अनलिमिटेड

रिपोर्ट  : बादल सरोज   जिस समयकाल से हम सब गुजर रहे हैं, हुकुम तो इसे अमृतकाल कहे जाने का है। कुछ दिलजले इसे त्रासद प्रहसन का समय कहते हैं, तो कुछ इसे दिलचस्प समय – इंट्रेस्टिंग टाइम – करार देते हैं। कईयों के मुताबिक़ यह विडम्बना का काल है, तो ज्यादातर के मुताबिक़ इसे […]

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भारतीय ज्ञान प्रणाली के नाम पर संघी दर्शन को पढ़ाने और वर्णाश्रमी…

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भारतीय ज्ञान प्रणाली के नाम पर संघी दर्शन को पढ़ाने और वर्णाश्रमी समाज को बनाने की साजिश

रिपोर्ट : संजय पराते भारत में पीएचडी शोध करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को यूजीसी-नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) देनी होती थी, जो 2024-25 तक भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘सहायक प्रोफेसर’ तथा ‘जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सहायक प्रोफेसर’ के लिए भारतीय नागरिकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए एक परीक्षा थी। 2024 में, केंद्र […]

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आतंकियों का धर्म नहीं होता, लेकिन धर्म की आड़ में छुपने की…

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आतंकियों का धर्म नहीं होता, लेकिन धर्म की आड़ में छुपने की कोशिश करते ये आतंकी कौन हैं?

  पहलगाम से लेकर युद्ध विराम तक के घटना विकास – जो किसी काण्ड से कम नहीं है —  और अचानक बीच में ही रोक दी गयी झड़प के नाम पर ऑपरेशन सिन्दूर के भुलावों को लेकर देश की संसद में हुई बहस में उठे सवालों से बचने और अपनी जाहिर-उजागर असफलताओं को ढांपने के […]

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आपरेशन सिंदूर’ : सिर्फ बहस, जवाब गायब

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आपरेशन सिंदूर’ : सिर्फ बहस, जवाब गायब

रिपोर्ट  : राजेंद्र शर्मा आखिरकार, संसद को पहलगाम के बैसरन में आतंकवादियों द्वारा किए गए हत्याकांड से लेकर, उसके बदले के नाम पर छेड़े गए ‘आपरेशन सिंदूर’ तक पर चर्चा का मौका मिल ही गया। बेशक, इस सिलसिले में यह दर्ज किया जाना जरूरी है कि संसद को बैसरन हत्याकांड के पूरे तीन महीने और […]

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वी.एस. अच्युतानंदन : समझौताहीन संघर्ष की कम्युनिस्ट परंपरा के प्रतीक

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वी.एस. अच्युतानंदन : समझौताहीन संघर्ष की कम्युनिस्ट परंपरा के प्रतीक

रिपोर्ट : पिनराई विजयन अनुवाद : संजय पराते कॉमरेड वी.एस. अच्युतानंदन का जीवन, जिनका सोमवार (21 जुलाई, 2025) को 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया, सामान्यतः केरल के इतिहास और विशेष रूप से, यहाँ के क्रांतिकारी आंदोलन का एक उल्लेखनीय अध्याय है। वी.एस. अच्युतानंदन संघर्षों की एक शानदार परंपरा, असाधारण दृढ़ संकल्प और […]

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कांवड़ यात्रा अब धार्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध राजनीतिक कार्यक्रम बन गयी है

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कांवड़ यात्रा अब धार्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध राजनीतिक कार्यक्रम बन गयी है

रिपोर्ट : महेंद्र मिश्र कांवड़िये किस तरह से सड़कों पर उपद्रव कर रहे हैं वह चर्चा-ए-आम है। आए दिन मारपीट और हिंसा की घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कहीं कांवड़ियों का कोई जत्था ढाबा तोड़ रहा है, तो कहीं कोई दुकान उनके निशाने पर है। कहीं किसी की कार तोड़ी जा रही है, तो […]

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एक शानदार हड़ताल के असर में निहित संदेश और सबक

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एक शानदार हड़ताल के असर में निहित संदेश और सबक

रिपोर्ट : बादल सरोज 9 जुलाई की राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में कोई 25 करोड़ हिन्दुस्तानियों की भागीदारी ने उसे सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के लिए भी एक बेमिसाल बड़ी कार्यवाही बना दिया है। दुनिया में कुल अस्तित्वमान 205 देशों में से सिर्फ 5 को छोड़कर किसी भी देश की इतनी आबादी भी नहीं है, […]

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अब मतदाता सूचियों में विदेशी नामों का हौवा

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अब मतदाता सूचियों में विदेशी नामों का हौवा

रिपोर्ट : राजेंद्र शर्मा जिसकी आशंका थी, बिहार में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के पीछे के असली खेल का पर्दे के पीछे से झांंकना शुरू हो गया है। यह शुरूआत हुई है इसके दावों के साथ कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के क्रम में घर-घर जाने से मिल रही जानकारियों से पता चला है कि मतदाता […]

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राजनैतिक व्यंग्य-समागम 1. भागवत जी के नाम मोदी का खुला खत :…

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राजनैतिक व्यंग्य-समागम 1. भागवत जी के नाम मोदी का खुला खत : विष्णु नागर

माननीय भागवत जी, अब तो आपने सबके सामने इशारे-इशारे में कह दिया है कि अगले 17 सितंबर को अपने 75 वें जन्मदिन पर मुझे झोला लेकर चल देना है। 75 की शाल ओढ़ कर मुझे दरकिनार हो जाना है, दूसरों को मौका देना है। बहुत खूब कहा। बहुत ऊंची सोच है आपकी। लगता है आपकी […]

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मरघट का सन्नाटा न पसरे, इसलिए आधे घंटे का डिजिटल मौन

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मरघट का सन्नाटा न पसरे, इसलिए आधे घंटे का डिजिटल मौन

रिपोर्ट : बादल सरोज इंसान होने की खूबी यह है कि वह ज़ुल्म के हद से ज्यादा बढ़ने के बाद भी समर्पण नहीं करता, प्रतिरोध तेज करता है और उसके नए-नए तरीके भी ढूंढता, तलाशता रहता है। कई बार, किसी निजी पहल के साथ सुझाए गए तरीके और किये गए आह्वान भी बिजली की रफ़्तार […]

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नोटबंदी से वोटबंदी तक

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नोटबंदी से वोटबंदी तक

रिपोर्ट : राजेन्द्र शर्मा बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षण के लिए स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय के तत्काल जरूरी होने को पहचानते हुए, इस पर विचार के लिए तीन दिन बाद, बृहस्पतिवार 10 जुलाई की तारीख तय […]

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आरएसएस : साम्राज्यवाद, फासीवाद और नाजी विचारधारा को फैलाने का हथियार

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आरएसएस : साम्राज्यवाद, फासीवाद और नाजी विचारधारा को फैलाने का हथियार

रिपोर्ट  : एम. ए. बेबी अनुवाद : संजय पराते प्रत्येक भारतीय को अपानी मान्यताओं के अनुसार जीने की स्वतंत्रता है। यही हमारे संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के मूल्य का आधार है। साथ ही, इसका यह भी अर्थ है कि धर्म को शासन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। फिर भी, जिन्होंने संविधान की रक्षा की शपथ […]

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धर्म-भाषा विवाद : खत्म होती राजनीति को बचाने की कोशिश

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धर्म-भाषा विवाद : खत्म होती राजनीति को बचाने की कोशिश

रिपोर्ट : मुकुल सरल कोई कहता है– जय श्रीराम बोलना होगा (हिंदुत्ववादी) कोई कहता है– मराठी बोलनी होगी (महाराष्ट्र में मनसे) कोई कहता है– हिंदी पढ़नी होगी (सरकार का त्रिभाषा फ़ार्मूला) कोई कहता है– हिंदी नहीं चलेगी। कर्नाटक, तमिलनाडु में हिंदी के साइन बोर्ड पर कालिख पोती जाती है। कोई कहता है– उर्दू नहीं चलेगी, […]

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संयम शांति और सादगी से हुआ चातुर्मास के लिए प्रवेश

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संयम शांति और सादगी से हुआ चातुर्मास के लिए प्रवेश

रेलमगरा. युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती मुनि संजय कुमार का सोमवार सुबह चातुर्मास हेतु तेरापंथ सभा भवन में प्रवेश हुआ। मुनि का आगमन बस स्टैंड से शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा फतेहनगर रोड, विजयवर्गीय मोहल्ला, सदर बाजार, चारभुजा मंदिर, जैन मंदिर, खाखल बावजी चौक होते हुए सभा भवन पहुंची। समाज के सदस्य […]

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राजनैतिक व्यंग्य-समागम

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राजनैतिक व्यंग्य-समागम

1. अवार्ड तो लाने दो यारो! : राजेन्द्र शर्मा भगवा भाईयों ने भी मोदी जी के विरोधियों को वो मुंह तोड़ जवाब दिया है कि पूछो ही मत। एक-एक गिनकर, साल-महीनावार पूरी लिस्ट बनाकर बता दिया है कि मोदी जी को परदेस में कब-कब, कहां-कहां और कौन-कौन से अवार्ड मिले हैं। और यह भी कि […]

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इंदिरा गांधी की इमरजेंसी बनाम संघ-भाजपा का अघोषित आपातकाल

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इंदिरा गांधी की इमरजेंसी बनाम संघ-भाजपा का अघोषित आपातकाल

रिपोर्ट : संजय पराते इंदिरा गांधी द्वारा 50 वर्ष पहले 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगाए जाने के कृत्य को इतिहास ने ग़लत साबित कर दिया है। उस अंधकारमय दौर को देश की जनता आज भी भूली नहीं है, जब उसके नागरिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। हालांकि यह इमरजेंसी संविधान के […]

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बोले तो अपने मन की बात ही बोले होसबोले

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बोले तो अपने मन की बात ही बोले होसबोले

रिपोर्ट  : बादल सरोज जिन्हें ढंग की बात करने से कन्नी काटनी होती है, वे मन की बात से भटकाने और बहलाने की पतली गली तलाशते हैं। इन दिनों जो कुनबा उठान पर है, वह इस कला में पूरी तरह दक्ष और सिद्धहस्त है। आज की चिताओं और समस्याओं से ध्यान बंटाने और उनसे बचते-बचाते […]

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कृष्ण कल्पित प्रसंग : केवल एक कवि का पतन नहीं, समूचे काव्य-प्रेमी…

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कृष्ण कल्पित प्रसंग : केवल एक कवि का पतन नहीं, समूचे काव्य-प्रेमी समाज की आत्मपरीक्षा है

रिपोर्ट  : अरुण माहेश्वरी पटना में कृष्ण कल्पित की हरकत केवल एक सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि एक विकृत आत्म-संरचना का उदाहरण भी है। वह जो अपने भाषिक तेवर में विद्रोही और मुक्त दिखाई देता है, वही कैसे भीतर ही भीतर असंख्य कुंठाओं और खास तौर पर स्त्रीत्व के बारे में अजीबोगरीब प्रतीकात्मक उहापोह (अस्थिरता) से […]

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मतदाता सूची पुनरीक्षण या मताधिकार पर हमला?

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मतदाता सूची पुनरीक्षण या मताधिकार पर हमला?

रिपोर्ट : राजेंद्र शर्मा यह अगर संयोग ही है, तब भी बहुत कुछ बताने वाला संयोग है। 25 जून को, जिस दिन बड़े जोर-शोर से ‘संविधान हत्या दिवस’ के नाम से मौजूदा शासन द्वारा इंदिरा गांधी की इमरजेंसी की पचासवीं बरसी मनायी जा रही थी, ठीक उसी रोज बिहार में, जहां अब से कुछ ही […]

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आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के समक्ष आरएसएस की समर्पणकारी भूमिका

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आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के समक्ष आरएसएस की समर्पणकारी भूमिका

रिपोर्ट : सवेरा अनुवाद : संजय पराते आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर, उन काले दिनों को याद करते हुए भाजपा और आरएसएस धार्मिक उत्साह से भरे हुए हैं। वे इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मना रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने एक पुस्तक का विमोचन किया है, जिसमें इस बात […]

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