Breaking News

आवश्यकता है “बेखौफ खबर” हिन्दी वेब न्यूज़ चैनल को रिपोटर्स और विज्ञापन प्रतिनिधियों की इच्छुक व्यक्ति जुड़ने के लिए सम्पर्क करे –Email : [email protected] , [email protected] whatsapp : 9451304748 * निःशुल्क ज्वाइनिंग शुरू * १- आपको मिलेगा खबरों को तुरंत लाइव करने के लिए user id /password * २- आपकी बेस्ट रिपोर्ट पर मिलेगी प्रोत्साहन धनराशि * ३- आपकी रिपोर्ट पर दर्शक हिट्स के अनुसार भी मिलेगी प्रोत्साहन धनराशि * ४- आपकी रिपोर्ट पर होगा आपका फोटो और नाम *५- विज्ञापन पर मिलेगा 50 प्रतिशत प्रोत्साहन धनराशि *जल्द ही आपकी टेलीविजन स्क्रीन पर होंगी हमारी टीम की “स्पेशल रिपोर्ट”

Wednesday, July 22, 2026 2:42:05 AM

वीडियो देखें

प्रशासनिक बाधाओं को लांघकर सीबीए दल पहुंचा सारकेगुड़ा, दी शहीदों को श्रद्धांजलि, किसान आंदोलन ने भी भेजा एकजुटता संदेश

प्रशासनिक बाधाओं को लांघकर सीबीए दल पहुंचा सारकेगुड़ा, दी शहीदों को श्रद्धांजलि, किसान आंदोलन ने भी भेजा एकजुटता संदेश
/ से बेखौफ खबर के लिए स्वतंत्र पत्रकार संजय पराते की रिपोर्ट

मुख्यमंत्री की अनुमति के बावजूद भी बीजापुर जिला प्रशासन द्वारा खड़ी की गई बाधाओं को लांघकर छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का एक प्रतिनिधिमंडल 28 जून को सारकेगुड़ा पहुंचने में सफल रहा। प्रतिनिधिमंडल ने नौ साल पहले फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सारकेगुड़ा के शहीदों को अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की तथा यहां आयोजित विशाल श्रद्धांजलि और प्रतिरोध सभा को संबोधित किया।इस सभा में दस हजार से ज्यादा आदिवासी शामिल हुए। विभिन्न जन संगठनों व आंदोलनों से जुड़े सीबीए के इस 15 सदस्यीय दल में सीबीए के संयोजक आलोक शुक्ला, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम, माकपा राज्य सचिव व छग किसान सभा राज्य अध्यक्ष संजय पराते, मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया व प्रियंका शुक्ला आदि शामिल थे, जिन्होंने इस जन सभा को संबोधित भी किया और आदिवासियों के संघर्षों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।

उल्लेखनीय है कि नौ वर्ष पहले वर्ष 2012 में नक्सलियों के नाम पर एक फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 7 नाबालिगों सहित 17 आदिवासियों की हत्या कर दी थी। इस जनसंहार के खिलाफ गठित एक जांच आयोग ने इन सभी आदिवासियों की हत्या के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन इसके बावजूद न तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने और न ही वर्तमान कांग्रेस सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की है। यह जन सभा इन्हीं शहीदों की याद में आयोजित की गई थी। इस जनसभा के केंद्र में सिलगेर में सैन्य कैम्प का विरोध कर रहे हजारों आदिवासियों के शांतिपूर्ण धरना पर 17 मई को चलाई गई गोलियां भी थी, जिसमें एक गर्भवती महिला सहित चार आदिवासी मारे गए हैं और पचासों घायल हुए हैं। इस हत्याकांड को भी कांग्रेस सरकार रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने से इंकार कर रही है।

सारकेगुड़ा में हुई जन सभा के लिए संयुक्त किसान मोर्चा और किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने भी एकजुटता संदेश भेजा था, जिसे अपने संबोधन के साथ किसान सभा नेता संजय पराते ने पढ़कर सुनाया। पूरा वक्तव्य इस प्रकार था :

सारकेगुड़ा के भाईयों और बहनों,
संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से राज्य प्रायोजित पुलिसिया दमन के खिलाफ आपके द्वारा चलाये जा रहे संघर्षों का हम समर्थन करते हैं और आपके आंदोलन के साथ इस देश की समूची किसान जनता और शोषित-उत्पीड़ित तबकों की एकजुटता व्यक्त करते हैं। आपका संघर्ष इस देश में किसानों-मजदूरों के अधिकारों के लिए चलाए जा रहे व्यापक संघर्ष का ही अभिन्न हिस्सा है। आप बस्तर क्षेत्र में धरना में बैठे हैं, हम यहां दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं।

बस्तर 5वीं अनुसूची का क्षेत्र है। यहां पेसा कानून लागू होना चाहिए और ग्राम सभा की सर्वोच्चता और आदिवासी समुदाय की राय का सम्मान होना चाहिए। यही हमारे देश का संविधान कहता है। हम इस देश में और बस्तर में संविधान और संवैधानिक प्रावधानों को उसकी भावना में लागू करने के लिए लड़ रहे है।

जो भी सरकार और प्रशासन संविधान के खिलाफ जाकर काम करेगी, सत्ता में बने रहने का उसको कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ऐसी सरकार की विदाई सुनिश्चित किया जाना चाहिये। प्रशासन के ऐसे आदेशों का कोई अर्थ नहीं है, जो आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलते हैं, उसका दमन करते हैं।

एक बार फिर हम आपके संघर्षों के साथ पूरे देश की जनता की एकजुटता का ऐलान करते है।

व्हाट्सएप पर शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *