सीटू के नेतृत्व में जेके मजदूरों सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन
कोटा। सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स) के नेतृत्व में कोटा कलेक्ट्रेट पर जेके मजदूरों सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों और चार श्रम संहिताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इन संहिताओं को रद्द करने और मजदूरों के हित में पूर्व में लागू 44 श्रम कानूनों को पुनः लागू करने की मांग की। जिला कलक्टर कोटा को राष्ट्रपति के नाम 21 सूत्री मांग पत्र सौंपा।
सीटू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर ने बताया कि संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया गया था। यह हड़ताल केंद्र सरकार की मजदूर, कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, महिला, छात्र और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर पूंजीपतियों के पक्ष में चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनका मजदूर संगठन पुरजोर विरोध करते हैं।कोटा में सीटू से संबद्ध निर्माण मजदूरों, राजीविका संविदा कर्मचारी महिलाओं, जेके मजदूरों, मेडिकल यूनियन, रेलवे कर्मचारियों, बैंक कर्मचारियों और शिक्षक संघ शेखावत के सदस्यों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन में भाग लिया। सीटू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि जिला कलक्ट्रेट गेट पर आयोजित सभा में हजारों मजदूरों ने हिस्सा लिया। इस हड़ताल को जनवादी महिला समिति और अखिल भारतीय किसान सभा ने भी समर्थन दिया।सभा को सीटू जिला अध्यक्ष राकेश गालव, जेके मजदूर नेता कामरेड हबीब खान, किसान सभा के जिला अध्यक्ष दुलीचंद बोरदा, रेलवे कर्मचारी यूनियन (एचएमएस) के महामंत्री मुकेश गालव, रोडवेज कर्मचारी जाकिर हुसैन, राजीविका संविदा कर्मचारी यूनियन की जिला सचिव गुड्डी बाई, अध्यक्ष शारदा देवी, संतोष, महिला समिति की जिला संयोजक पुष्पा खींची, अध्यक्ष रजनी शर्मा, मंत्री रोशिया और कामरेड नरेंद्र सिंह ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के हक और अधिकार छीनने वाली हैं, जिन्हें तत्काल रद्द कर 44 श्रम कानूनों को पुनः लागू किया जाए।कामरेड हबीब खान ने बताया कि बंद पड़ी जेके फैक्ट्री के 4200 मजदूरों का 28 साल का बकाया वेतन, जो ब्याज सहित 500 करोड़ रुपये से अधिक है, सरकार को तुरंत भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेके मजदूरों का धरना 142 दिनों से जारी है और उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। उन्होंने ऐलान किया कि 18 जुलाई को दिल्ली से कामरेड वृंदा करात कोटा आएंगी और धरने को संबोधित करेंगी। उन्होंने कोटा के सभी मजदूरों और वामपंथी संगठनों से 18 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर भारी संख्या में पहुंचने की अपील की।
सभा को इन्होंने किया संबोधित
सीटू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर ने बताया कि प्रदर्शन के बाद आयोजित सभा को कामरेड हनुमान सिंह, सतीश चंद्र त्रिवेदी, कालीचरण सोनू, लटूरलाल, केदार जोशी, जाहिदा बानो, रमा रघुवंशी और बानोबी ने भी संबोधित किया। धरने का संचालन कामरेड अशोक सिंह ने किया।सीटू जिला कमेटी ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी मजदूर संगठनों, कर्मचारियों, महिलाओं और किसानों का आभार व्यक्त किया।
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