हादसे में हताहत बच्चों के परिजनों को दी सांत्वना
कोटा/ मनोहरथाना। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री व झालरापाटन से मौजूदा विधायक वसुंधरा राजे सिंधिया ने मनोहरथाना बलॉक के पिपलोदी गांव पहुंचकर स्कूल में हुए हादसे पर शोक बताया। उन्होंने हादसे में हताहत हुए बच्चों को परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। इसके बाद चांदपुरा भीलान जाकर भी शोक प्रकट किया।
जानकारी के अनुसार राजे हादसे में हताहत हुए एक-एक बच्चे के घर गईं और बच्चों के परिजनों को हर संभव मदद का वादा किया। उन्होंने कहा कि मैं भी एक मा हूं। ये हादसा माता-पिता और बच्चों के सपनों का अंत है। चांदपुरा भीलान में उन्होंने भरे मन से कहा कि यह ऐसी घटना है, जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया है। पीड़ित परिवारों से मिलने वसुंधरा राजे पहुंचीं तो उनकी गोद में सर रखकर पीड़ित परिवारों के लोग फूट-फूट कर रोए।
मृतक के परिजन को संविदा पर नौकरी
राजे के साथ उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह, जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़, एसपी अमित कुमार भी मौजूद रहे। पूर्व सीएम राजे ने मासूम भाई-बहन कान्हा और मीना के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान कई महिलाएं उनसे लिपटकर बिलख पड़ीं। उन्होंने मौके पर ही मृतक के परिजन को संविदा नौकरी का जॉइनिंग लेटर सौंपा और 20 लाख रुपए की सहायता के साथ 1 लाख रुपए मकान निर्माण के लिए अलग से देने की घोषणा की।
गमगीन माहौल में किया अंतिम संस्कार
पिपलोदी स्कूल हादसे में मौत का शिकार हुए सात बच्चों का 24 घटे पश्चात अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव निवासी 6 बच्चों का पिपलोदी गांव में, जबकि एक बच्चे का पास के गांव चांदपुरा भीलान में अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार सुबह हुए हादसे में स्कूल की बिल्डिंग में दबकर जान गंवाने वाले मृतक बच्चों में पायल पुत्री लक्ष्मण, प्रियंका पुत्री मांगीलाल, सतीश पुत्र हरकचंद, हरीश पुत्र बाबूलाल, कान्हा पुत्र छोट्लाल, मीना पुत्री छोटलाल, कुंदन पुत्र बीरम सभी बच्चों के शव शुक्रवार शाम को पोस्टमार्टम की सहमति बनने के पश्चात पोस्टमार्टम करवा कर मनोहरथाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवा दिए गए थे। झालावाड़ अस्पताल से भी शव रात को ही मनोहरथाना अस्पताल में शिफ्ट कर दिए गए थे। बच्चों के परिजनों द्वारा रात्रि के समय अंतिम संस्कार नहीं करके शनिवार सुबह अंतिम संस्कार किए जाने की बात कहने के पश्चात प्रशासन द्वारा बच्चों के शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया था जहां से शनिवार सुबह सभी शव परिजनों को सौंप दिए गए तथा अलग अलग गाड़ियों से सभी शवों को बच्चों के गांव भिजवाया गया। सुबह लगभग 7:30 बजे तक सभी शवों को अंत्येष्टि के लिए शमशान तक पहुंचा दिया गया था। बाद में शमशान में की जाने वाली सभी क्रियाएं संपन्न हुईं । उसके पश्चात चिताओं को मुखाग्नि दी गई। पीपलोदी गांव में 5 शवों का अंतिम संस्कार एक ही स्थान पर किया गया। जिसमें दो सगे बहन भाई भी शामिल थे। इसके अतिरिक्त एक अन्य बालिका पायल का अंतिम संस्कार स्कूल भवन के निकट की भूमि में किया गया।
गांव में मचा कोहराम
स्कूल हादसे में मरने वाले सभी बच्चों के शवों को जैसे ही पीपलोदी लाया गया तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। पूरे गांव में महिलाओं के विलाप की आवाज गूंजने लगी। वहीं सभी पुरुषों की भी आंखें भर आई। खासतौर पर मरने वाले बच्चों के घर की महिलाओं का रो रोकर बुरा हाल होते देखा गया।
10 लाख रुपए, संविदा पर नौकरी और एक कमरा
पिपलोदी के सरकारी स्कूल की बिल्डिंग के नीचे दबकर जान गंवाने वाले सातों बच्चों के परिवार वालों को 10 लाख रुपए और संविदा पर नौकरी मिलेगी। साथ ही नए स्कूल भवनों में बनने वाले कक्षा कक्ष का नाम मृतक बच्चों के नाम पर रखा जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री सिंधिया ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान उन्हें चेक और संविदा पर नौकरी के जॉइनिंग लेटर सौंपा।
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