नदी में स्थित पेड़ों पर चढ़कर किया प्रदर्शन
-महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान
रामगंजमंडी ताकली बांध विस्थापितों का गुस्सा बुधवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब सात गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। आंदोलन कारियों ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर नदी में स्थित पेड़ों पर चढ़कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस बीच आंदोलन की बागडोर महिलाओं ने अपने हाथों में संभाली और सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है। अब वे अपने हक के लिए सड़क और नदी दोनों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं।
ताकली बांध के विस्थापित परिवारों ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 18 साल की उम्र पार कर चुके युवाओं को भूखंड नहीं दिए गए। पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला और खेतों का अतिरिक्त मुआवजा भी लंबित है। हाल ही में जल संसाधन विभाग द्वारा बांध क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंध नोटिफिकेशन से ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। महिलाएं हाथों में तख्तियां लिए बांध की ओर बढ़ीं तो पुलिस ने उन्हें रस्सियों से रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद महिलाएं पीछे नहीं हटीं और प्रशासन पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
प्रशासन ने किए सुरक्षा के कड़े इंतजाम
स्थिति को देखते हुए रामगंजमंडी, चेचट, मोड़क और सुकेत थानों से 50 से अधिक पुलिस कर्मियों को मौके पर तैनात किया गया है। एसडीआरएफ की टीम नाव से नदी में लगातार गश्त कर रही है। डीएसपी घनश्याम मीणा और एसडीएम चारु वर्मा मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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मंगलवार को उपखंड कार्यालय में ग्रामीणों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में प्रशासन ने उनकी मांगों पर प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके कुछ लोग तुरंत समाधान की मांग करते हुए जल सत्याग्रह पर उतर आए। फिलहाल आंदोलन शांतिपूर्ण है।
-घनश्याम मीणा, डीएसपी
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