छह माह बाद भी सीटू के बैनर तले धरने पर डटे हुए हैं मजदूर
कोटा। कोटा कलेक्ट्रेट पर 18 फरवरी से धरने पर बैठे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के बकाया भुगतान मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
सीटू मीडिया प्रभारी ने बताया कि 19 अगस्त को जयपुर हाईकोर्ट में बकाया वेतन से संबंधित मामले की सुनवाई हुई। जिसमें कामरेड हबीब खान, नरेंद्र सिंह, उमाशंकर, अली मोहम्मद, अशोक सिंह और सतीश चंद त्रिवेदी शामिल हुए। कोर्ट ने मजदूरों के हित में फैसला सुरक्षित रखा है मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
मीडिया प्रभारी ने बताया कि जेके फैक्ट्री के 4200 मजदूरों का 28 साल से बकाया वेतन और ड्यूज ग्रेच्युटी की मांग को लेकर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) के बैनर तले कोटा के जिला कलेक्ट्रेट पर चल रहा अनिश्चित कालीन धरना 183 वें दिन भी जारी रहा। मजदूर नेताओं ने सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने और 500 करोड़ रुपए से अधिक के बकाया भुगतान की मांग दोहराई। इस ऐतिहासिक आंदोलन में मजदूरों के साथ उनके परिवार, महिलाएं और बच्चे भी डटे हुए हैं। 18 फरवरी से शुरू हुए इस धरने में जेके फैक्ट्री के मजदूरों ने अपनी एकजुटता और संघर्ष की मिसाल कायम की है। धरने का नेतृत्व सीटू की तीनों मजदूर यूनियनों के महासचिवों कामरेड हबीब खान, कामरेड उमाशंकर, और कामरेड नरेंद्र सिंह के हाथों में है। 183 वें दिन मंगलवार को धरने का संचालन कामरेड हनुमान सिंह ने किया।
मजदूर नेता महावीर प्रसाद ने बताया कि सरकार के दबाव में फैक्ट्री की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से मालिक अराफात बौखला गया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए जयपुर हाईकोर्ट में भागदौड़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह लाल झंडे की ताकत और मजदूरों के संघर्ष का नतीजा है कि पूंजीपति मालिक को फैक्ट्री से बेदखल होना पड़ा।
वृंदा करात का कोटा दौरा 1 सितंबर को
मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि सीपीआईएम की राष्ट्रीय महिला नेता और पूर्व पॉलिट ब्यूरो सदस्य कामरेड वृंदा करात 1 सितंबर को धरने को समर्थन देने कोटा पहुंचेंगी। जेके मजदूर जोर-शोर से इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं।
183 वें दिन धरने को इन्होंने किया है
मंगलवार को 183 वें दिन धरने को कामरेड कालीचरण सोनी, केदार जोशी, मंगल सिंह, मोहम्मद मंसूरी, लटूरलाल बैरवा, बच्चन सिंह जायसवाल, महावीर प्रसाद बैरवा और हनुमान सिंह ने संबोधित किया।
आंदोलन से बढ़ी मजदूरों की ताकत
मुरारीलाल बैरवा ने कहा कि मजदूरों का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार 4200 मजदूरों को उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं कर देती। धरने में सैकड़ों की संख्या में मजदूरों के परिवार, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो जिला कलेक्ट्रेट पर डटे हुए हैं। यह आंदोलन न केवल बकाया वेतन के लिए है, बल्कि मजदूरों के हक और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। छह महीने के लगातार जारी धरने से पूरे देश के मजदूरों की ताकत बढ़ी है।
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