पटना के एक चर्चित अस्पताल ने सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती निकाली थी, लेकिन इन पदों के लिये पुरुष उम्मीदवारों को भी बुलावा भेजकर चौंका दिया है. इसके सामने आने के बाद सैंकड़ों अन्य पुरुष उम्मीदवारों और अस्पताल के भी कुछ कर्मचारियों ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाया है.अस्पताल ने इस साल मार्च में कई पदों के लिए विज्ञापन निकाला था. जिसमें रेडियोलॉजी टेक्निशियन के तीन पद भी शामिल है. तीनों में से एक-एक पद सामान्य, अति पछिड़ा वर्ग (ईबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के लिए आरक्षित बताया गया. लेकिन 18 जून को आईजीआईएमएस ने अगले चरण के लिए चयनित उम्मीदवारों की जो सूची जारी की उसमें पांच पुरुष उम्मीदवार भी हैं.अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से पूछे गए सवाल पर उन्होंने केंद्र सरकार के किसी नियम का हवाला देते हुए कहा, “नियम के मुताबिक अगर आरक्षित पद के लिए उस श्रेणी से किसी उम्मीदवार ने आवेदन नहीं किया हो तो अन्य उम्मीदवारों पर विचार किया जा सकता है.”
उनका कहना था, “हमने पुरुष अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे ही नहीं थे, लेकिन आ गए. अब सवाल था कि क्या किया जाए? तब जाकर नियमावली देखी गई. इसके आधार पर ही सूची प्रकाशित की गई.”
लेकिन जब उनसे ये पूछा गया कि इसका जिक्र विज्ञापन में क्यों नहीं था, तो उनका कहना था, “ऐसा होना चाहिए.”
मनीष मंडल के पास इसका भी कोई जवाब नहीं था कि आखिर किस आरक्षित श्रेणी से किसी महिला उम्मीदवार ने आवेदन नहीं दिया. दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन से जुड़े एक सूत्र ने मंडल के दावे को खारिज करते हुए कहा, “जो सूची जारी की गई है उसी में तीनो आरक्षित वर्गों की महिलाएं शामिल है. फिर पुरुष उम्मीदवार कैसे आ गए?”
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए पहली की परीक्षाओं की भी जांच कराने की मांग की. रेडियोलॉजी टेक्निशियन के लिए सारी योग्यता रखने वाले दिनेश कुमार ने कहा कि उन्होंने और उनके साथियों ने इस लापरवाही की शिकायत अस्पताल से की है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उनका कहना था, “हम जैसे सैंकड़ों छात्रों के साथ खिलवाड़ हुआ है. अगर विज्ञापन में ही इसका जिक्र होता कि पुरुषों को भी बुलाया जाएगा तो हमें भी मौका मिलता. अब इसकी जांच होनी चाहिए.”
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