रिपोर्ट : राजेंद्र शर्मा चचा ग़ालिब ने तो गोरों के लिए तभी कह दिया था -- ग़ालिब न ये समझे हैं, न समझेेंगे मेरी बात! जो गोरे उस शायर तक की बात नहीं समझे, जिसकी शायरी बहादुरशाह के दिल्ली दरबार
ग़ालिब न वो समझे हैं, न समझेंगे डेमोक्रेसी की मम्मी की बात


