- कोटा में सीटू का विरोध प्रदर्शन 26 नवंबर को
- 279वें दिन भी जारी रहा जे.के. मजदूरों का धरना
कोटा। सरकार के श्रम सुधार दावों का सीआईटीयू ने कड़ा खंडन किया है। केंद्र सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा 21 नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में चार श्रम संहिताओं को मजदूर हितैषी और आधुनिक बताने के दावों को भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीआईटीयू) ने पूरी तरह झूठा और धोखेबाज करार दिया है।
सीआईटीयू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि ये संहिताएं आजादी के बाद मजदूरों के कड़े संघर्षों से हासिल अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला हैं और इनका मकसद कॉर्पोरेट घरानों के लिए लूट-खसोट, ठेका प्रथा और बेलगाम छंटनी को कानूनी संरक्षण देना है।
29 कानूनों को 4 संहिताओं में सरल बनाने का दावा झूठा है। यह सरलीकरण नहीं, बल्कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, फैक्ट्री अधिनियम, ठेका मजदूर अधिनियम जैसे पुराने सुरक्षात्मक कानूनों की धाराओं को कमजोर करने और खत्म करने का बहाना है। नौकरी की सुरक्षा खत्म हो रही है, श्रम विभाग को बेकार किया जा रहा है और 90% से ज्यादा असंगठित मजदूरों को नियुक्ति पत्र तक नहीं मिलेगा।
सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का दावा खोखला
सामाजिक सुरक्षा संहिता में कहीं भी सभी मजदूरों के लिए सार्वभौमिक कवरेज की गारंटी नहीं है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सिर्फ “योजनाएं बनाने” की बात है न समय-सीमा है, न निश्चित लाभ और ना ही न बजट आवंटित किया गया है।
26 नवंबर को कोटा में होगा जोरदार प्रदर्शन
सीआईटीयू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर और जे.के. मजदूर नेता कामरेड हबीब खान ने ऐलान किया कि चारों श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर 26 नवंबर (बुधवार) को कोटा जिले के मजदूर सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
279वें दिन भी कलेक्ट्रेट गेट पर डटे रहे मजदूर
18 फरवरी 2025 से जिला कलेक्ट्रेट गेट पर जे.के. मजदूरों का बकाया वेतन दिलाने की मांग को लेकर चल रहा धरना 279वें दिन भी जारी रहा। रविवार को रजिस्टर में 570 मजदूरों ने हाजिरी लगाई, जिनमें बड़ी संख्या में महिला मजदूर शामिल थीं।
279 वें दिन धरने को इन्होंने किया संबोधित
279 वें दिन धरने को कामरेड उमाशंकर, हबीब खान, नरेंद्र सिंह, मदन मोहन शर्मा, गोपाल शर्मा, शिशुपाल, कैलाशी बाई, निर्मला बाई, उर्मिला बाई समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। धरने का संचालन कामरेड अशोक सिंह ने किया। 26 नवंबर के प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए अपील पत्र बांटे गए और मजदूरों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की गई।
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ये चारों श्रम संहिताएं मजदूरों को कॉर्पोरेट घरानों का सस्ता गुलाम बनाने का औजार हैं, हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।”
-कामरेड हबीब खान, मजदूर नेता, सीटू
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