जेके लोन अस्पताल के संविदा कर्मियों ने कलक्ट्रेट पर शुरू किया धरना-प्रदर्शन
ढाई माह से मानदेय नहीं मिलने तथा अस्पताल प्रशासन के हाजरी रजिस्टर में साइन नहीं करने देने से खफा जेके लोन अस्पताल के संविदा कर्मियों ने नर्सिंग छात्र संगठन भारत के बैनर तले कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन कर धरना शुरू कर दिया है। सोमवार से जारी इस धरने को गुरूवार को चौथा दिन था।
नर्सिंग छात्र संगठन भारत के जिलाध्यक्ष फैयाज खान ने बताया कि जेके लोन अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग कर्मियों को पिछले ढाई माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है। साथ ही जब ड्यूटी पर जाते हैं तो रजिस्ट्रर गायब कर दिया जाता है। उपस्थिति रजिस्ट्रर में साइन नहीं करने दे रहे। जिससे हमारी ड्यूटी होते हुए भी काउंट नहीं हो रही। जबकि हमारी जगह नई भर्ती कर ली गई है। उन्हें मानदेय दिया जा रहा है और हमारा रोक लिया गया है।
बिना कारण बताए रोका मानदेय
संगठन के सलमान खान, राजीव वर्मा, श्रवण कुमार ने बताया कि जेके लोन अस्पताल में ठेका फर्म स्विफ्ट सिक्योरिटास के माध्यम से निरंतर कार्य कर रहे हैं। मई 2025 से हमें बिना कोई कारण के मानदेय नहीं दिया जा रहा। ठेका फर्म द्वारा हमें हटाए जाने का भी कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया है। इसके बावजूद पिछले ढाई माह से हमारा वेतन रोक लिया गया। मौखिक में भी इस संबंध में कुछ नहीं बताया गया। इसके बावजूद जब हम ड्यूटी पर जाते हैं तो उपस्थिति रजिस्टर में साइन नहीं करने देते। ऐसे में कर्मचारी मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान हैं। नर्सिंग कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अधिकारियों से लगाई फरियाद, सुनवाई कहीं नहीं
नर्सिंगकर्मी रतन व दानिश का कहना है कि अस्पताल में 25 से 30 संविदा कर्मचारी हैं, जिनमें से कोई दो तो कोई ढाई साल से कार्यरत हैं। तीन साल पूरे होने पर हमारा प्रोविजनल पीरियड पूरा हो जाता है, जिसके अंक प्रतियोगी परीक्षाओं में जुड़ते हैं। मगर ठेकेदार द्वारा प्रोविजनल पीरियड पूरा होने से पहले ही हमें न तो काम करने दिया जा रहा और न ही हमारा मानदेय दिया जा रहा है। प्रोविजनल पीरियड पूरा होने पर कॅरियर को नुकसान पहुंचेगा। जबकि हमें लिखित में कार्यमुक्ति का कोई आदेश भी नहीं मिला है। ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि हमें हटा दिया गया या नहीं। जब हम ड्यूटी पर जाते हैं तो उपस्थिति रजिस्टर में साइन नहीं करने देते। बिना उपस्थिति दर्ज कराए हमारे कार्य दिवस काउंट नहीं होते। जिला कलक्टर से समस्या समाधान की मांग की है।
आम आदमी पार्टी ने दिया समर्थन
वहीं बुधवार के आम आदमी पार्टी कोटा जिला इकाई के नेताओं ने बुधवार को धरना स्थल पर पहुंचकर संविदा कर्मियों को अपना समर्थन दिया। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट कुंज बिहारी सिंघल ने बताया कि जेके लोन मातृ शिशु चिकित्सालय, कोटा में लंबे समय से कार्यरत संविदा नर्सिंग स्टाफ को बिना किसी पूर्व सूचना अथवा नोटिस के अचानक कार्य से हटाया गया है। इन कर्मियों की मई व जून 2025 की सैलरी अब तक नहीं दी गई है, जो कि श्रम कानूनों का घोर उल्लंघन है। गंभीर तथ्य यह है कि नई निविदा प्राप्त फर्म रक्षक सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नए कर्मियों की नियुक्ति के समय उनसे ₹1.5 लाख से 2 लाख तक की अवैध राशि वसूल की जा रही है। यह राशि अनुभव देने के नाम पर ली जाती है, जिससे सरकारी भर्तियों में अंक लाभ मिलता है। यह न केवल भ्रष्टाचार और जबरन वसूली का मामला है, बल्कि गरीब और बेरोजगार युवाओं के जीवन व अधिकारों से सीधा खिलवाड़ है। जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर उन्होंने बिना सूचना हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को न्याय दिया जाकर सेवारत रखने की मांग की।
इन मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
जिला कलक्टर को दिए ज्ञापन में संविदा कर्मियों को उनका बकाया वेतन तत्काल भुगतान कराने, उक्त फर्म द्वारा की जा रही अवैध वसूली की उच्च स्तरीय जांच कराई जाने तथा अधीक्षण स्तर पर कोई लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उस पर भी कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने आदि मांगें रखी गई हैं
चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ करने की चेतावनी
जिलाध्यक्ष सिंघल ने कहा कि आगामी 7 दिवसों में कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं होती है तो आम आदमी पार्टी कोटा इस अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ करने को बाध्य होगी।
गुरुवार को पहुंचे बीजेपी देहात जिलाध्यक्ष
नर्सिंग छात्र संगठन भारत के जिलाध्यक्ष फैयाज खान ने बताया कि गुरूवार को ग्रामीण भारतीय जनता पार्टी कोटा के जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने संविदा नर्सिंग स्टाफ की मांगों को अच्छी तरह से समझा और सुना। उन्होंने हमें पूर्ण रूप से आश्वासन दिया कि आपकी मांगों को जल्द उच्च पदाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और आपकी मांगों का निवारण किया जाएगा।
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यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। ठेकेदार द्वारा ही कार्य सम्पन्न होता है। इन्हें हटाया गया या नहीं, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। रही बात उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं करने देने की तो रजिस्टर भी ठेकेदार द्वारा ही मेंटेन किया जाता है। कंट्रोलिंग पावर उन्हीं के पास होती है।
-मोहन लाल बैरवा, नर्सिंग अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल
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