बकाया भुगतान की मांग को लेकर जेके मजदूरों के धरने को पांच माह पूरे
-150 वें दिन भी जारी रहा 18 फरवरी से चल रहा धरना
बकाया भुगतान की मांग को लेकर कोटा कलेक्ट्रेट पर चल रहा जेके फैक्ट्री के मजदूरों का धरना गुरुवार को 150 वें दिन भी जारी रहा। वहीं धरने के पांच माह पूरे होने पर सीपीआईएम नेता वृंदा करात का प्रस्तावित कोटा दौरा टल गया है।
सीटू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि कोटा के इतिहास में मजदूरों का यह सबसे बड़ा आंदोलन है। 1997 में बंद हुई जे.के. फैक्ट्री के मजदूर पिछले पांच महीनों से अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे हैं। मजदूरों ने बिना किसी जनप्रतिनिधि के सहयोग के अपनी लड़ाई लड़ी और फैक्ट्री से अवैध कब्जाधारी आराफात को बेदखल करवाया। उनके दबाव में प्रशासन ने मशीनों की चोरी करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उनकी तलाश जारी है। जल्द ही आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार अब मजदूरों के बकाया वेतन के मुद्दे पर गंभीरता दिखा रही है और जल्द ही मजदूर नेताओं के साथ वार्ता शुरू हो सकती है। इस धरने ने सरकार की पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियों को उजागर किया है, जिससे कोटा के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ा है।
ये कहना है मजदूर नेताओं का
मजदूर नेता हबीब खान, उमाशंकर और नरेंद्र सिंह ने कहा कि 28 साल से बकाया वेतन की मांग को लेकर संघर्ष चल रहा है। कानूनी लड़ाई जीतने के बाद अब धरने के दबाव में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। यह सब मजदूरों के लाल झंडे के संघर्ष और कोटा की आम जनता व अन्य मजदूर संगठनों के सहयोग से संभव हुआ। हालांकि, कोटा के जनप्रतिनिधियों ने मजदूरों का साथ नहीं दिया और भूमाफियाओं के पक्ष में खड़े रहे।नेताओं ने बताया कि फैक्ट्री मालिक ने सरकार के साथ मिलकर मजदूरों को बर्बाद करने की नियत से फैक्ट्री बंद की थी। अब मजदूर जिला कलेक्ट्रेट के सामने पांच महीने से धरना देकर फैक्ट्री को पुनः शुरू करवाने और 4200 मजदूरों के बकाया वेतन (ब्याज सहित 500 करोड़ रुपये से अधिक) की मांग कर रहे हैं।
150 वें दिन धरने को इन्होंने किया संबोधित
150 वें दिन धरने को लटूर लाल, सतीश त्रिवेदी, कालीचरण सोनी, अली मोहम्मद, हनुमान सिंह, पुष्पा खींची, जाहिदा बानो, राजकुमारी देवी, रामकन्या देवी, और कैलाशी देवी ने संबोधित किया। कोटा में तेज बारिश के बावजूद सैकड़ों महिला और पुरुष मजदूर धरने में डटे रहे, बकाया वेतन और फैक्ट्री को पुनः शुरू करने की मांग को लेकर।
जनप्रतिनिधियों की बढ़ी चिंता
मीडिया प्रभारी ने कहा कि धरने की सफलता से मजदूरों में बकाया वेतन मिलने की उम्मीद जगी है। धरने में महिलाओं और पुरुषों की बढ़ती संख्या ने सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आगामी चुनावों में उन्हें मजदूरों का सामना करना पड़ेगा। सीटू के बैनर तले यह धरना बकाया वेतन मिलने तक जारी रहेगा।
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