कामखेड़ा बालाजी धाम से हुई पदयात्रा की शुरूआत
11 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष का ऐलान
मनोहरथाना। राजनीति में फिर से सक्रिय होते हुए नरेश मीणा ने सोमवार को मनोहरथाना विधानसभा के कामखेड़ा धाम से अपनी बहुचर्चित जनक्रांति यात्रा का शुभारंभ किया।
एसडीएम थप्पड़ कांड के मामले में आठ महीने तक टोंक जेल में बंद रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए नरेश मीणा अब प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर जनआंदोलन की राह पर पैदल निकल पड़े हैं। यात्रा की शुरूआत मनोहरथाना विधानसभा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कामखेड़ा बालाजी धाम से की गई। नरेश मीणा 12 बजे दोपहर को अपने समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे और गर्भगृह में भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा की। मंदिर समिति की ओर से उनका ओढ़ना ओढाकर और प्रसाद भेंट कर स्वागत किया गया। वहां मौजूद श्रद्धालुओं से भी मीणा ने संवाद किया और आशीर्वाद लिया। इस बीच उन्होंने कहा कि चाहे मेरे पैरों में छाले पड़ें या बदन से चमड़ी उतरे, जब तक भ्रष्टाचार और बेलगाम ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो जाती, यह यात्रा जारी रहेगी। मंदिर दर्शन के बाद मीणा गांव के सभा स्थल पहुंचे। उन्होंने भ्रष्टाचार, नशाबंदी, बेलगाम जगाम ब्यूरोक्रेसी, युवा बेरोजगार और ग्रामीण विकास जैसे सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इन मुद्दों को 11 सूत्रीय एजेंडे के रूप में पेश करते हुए उन्होंने जनसमर्थकों से अपील की कि वे इस जनक्रांति यात्रा से जुड़ें और बदलाव के आंदोलन का हिस्सा बनें।
जगह-जगह हुआ स्वागत
नरेश मीणा का कामखेड़ा धाम पहुंचने से पहले अकलेरा में उनके समर्थकों और स्थानीय ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। झंडों, बैंड-बाजों और नारों के साथ यात्रा को ऐतिहासिक रंग देने की कोशिश की गई। इसी दौरान मीणा ने नगर में स्थित शहीद मुकुट बिहारी मीणा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
कोटा में होगा समापन
यह जनक्रांति यात्रा कामखेड़ा धाम से सोमवार को 2.30 पर शुरू होकर अकलेरा होते हुए सोमवार शाम को बारां जिले के हरनावदा पहुंची। अगले आठ दिनों में यह यात्रा बारां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए कोटा के त्रिकुटा माता मंदिर पर समाप्त होगी। यात्रा के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढा, उत्तरप्रदेश से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान और भरत सिंह भी नरेश मीणा के साथ नजर आए। जो यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना रही है।
समरावता में जो हुआ, ये भीड़ उसका जवाब
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढा ने कहा कि जो अत्याचार नरेश मीणा के साथ हुआ है वह अब नहीं सहन किया जाएगा। ऐसे में सरकार द्वारा जो नरेश मीणा के साथ किया गया है, अब किसी अन्य के साथ नहीं होगा। समरावता गांव की हिंसा को लेकर राजेंद्र गुढा ने कहा कि गांव को वीरान कर दिया। महिलाओं और बच्चों के साथ जो किया गया, ये भीड़ उसका जवाब है। इसके पीछे एक संदेश है। भविष्य के अंदर किसी नरेश मीणा जैसे किसी भी व्यक्ति पर हाथ डालने से पहले सरकार 100 बार सोचेगी। किसी नौजवान को नाजायज तरीके से जेल में डालने के लिए शासन और प्रशासन बार-बार सोचेगा।
प्रदेश की राजनीति में उभर सकते हैं नए समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेश मीणा की यह यात्रा न सिर्फ उनके राजनीतिक पुनरागमन का संकेत है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण को भी जन्म दे सकती है। खासकर हाड़ौती क्षेत्र में यह यात्रा जनभावनाओं को प्रभावित करने का कारगर माध्यम बन सकती है।
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