माकपा प्रतिनिधि मंडल ने पिपलोदी स्कूल हादसे में मृत छात्रों के परिजनों से की मुलाकात
माकपा के एक प्रतिनिधि मंडल ने झालावाड़ जिले में मनोहरथाना बलॉक के पिपलोदी स्कूल हादसे में मृत छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की है। प्रतिनिधि मंडल ने परिजनों से मुलाकात कर हादसे की जानकारी ली।
माकपा के राज्य सचिव मंडल के सदस्य व अखिल भारतीय किसान सभा, कोटा के जिलाध्यक्ष कामरेड दुलीचंद बोरदा ने बताया कि हाल ही में झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की इमारत ढहने से करीब 70 स्कूली बच्चे मलबे में दब गए थे। इस हादसे में सात छात्रों की दर्दनाक मृत्यु हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैला दी। लेकिन शिक्षा मंत्री की संवेदन हीनता तब सामने आई जब वे घटना के तीसरे दिन जब बच्चों की अर्थी सजाई जा रही थी उसी समय भरतपुर में फूलों का हार पहन कर अपना स्वागत सम्मान करवा रहे थे। माकपा कोटा जिला सचिव हबीब खान और मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने इसे सरकार और शिक्षा मंत्री के लिए शर्मनाक बताया।
प्रतिनिधि मंडल में ये थे शामिल
प्रतिनिधि मंडल में राज्य सचिव कामरेड किशन पारीक, किसान सभा के राज्य अध्यक्ष व पूर्व विधायक कामरेड पेमाराम, कोटा जिला सचिव हबीब खान, दुलीचंद बोरदा, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र कुमार, पंकज कुमार, कपिल कुमार, नारायण शर्मा, भागीरथ प्रसाद मीणा, आदित्य देव, बृजमोहन, रवि जैन आदि शामिल थे। प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हादसे की जानकारी ली।
आदिवासी समाज के थे सभी मृतक बच्चे
प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने बताया कि हादसे में मृत और घायल अधिकांश बच्चे भील आदिवासी समुदाय के थे, जो अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। रैदास परिवार के दोनों बच्चों की मृत्यु हो गई। जबकि बाबूलाल भील के परिवार के पास रहने के लिए मकान तक नहीं है।
प्रतिनिधि मंडल सदस्यों ने रखीं ये मांगें
राज्य सचिव कामरेड किशन पारीक और प्रतिनिधि मंडल ने सरकार के सामने मृतक छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपए व घायल छात्रों को 10-10 लाख रुपए की सहायता देने, प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सभी पीड़ित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान, सरकार को इस घटना से सबक लेते हुए जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवनों के लिए बजट आवंटित करने आदि मांगें रखी हैं।
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