भारत सरकार के बडे बडे दावो का कोरोना वायरस ने पोल खोल दिया। चाहे गरीबो के नीतियों को लेकर के हो या अन्य नीतियां हो। जिस तरह इस समय प्रवाशी मजदूर रोड के ऊपर अपना सफर पैदल तय कर रहा है भूखे प्यासे रहकर और न ही इन लोगों के लिए खाने की इन्तजाम है न ही सावारी ऐसे में अगर कोई इन गरीबों तथा मजदूरों के लिए सुविधा मुहैया कराने की परमीशन मांगता है तो सरकारें परमीशन ही नहीं देती ऐसे में हमे सन 1947 का याद दिलाता है उस समय भी ऐसे ही लोग सफर कर रहे थे लोग यहाँ से पाकिस्तान जा रहे थे और पाकिस्तान से भारत आ रहे थे लेकिन एक फरक था रास्ते में रोटियो का इन्तिजाम था। इस से बेहतर तो नेता अपने रैलियों में ले जाने के लिए सवारी का इंतजाम करते हैं। लेकिन कोई बात नहीं भारत विश्व गुरू तो है। भारत सरकार ने गरीबों के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान तो कर दिया और इतनी बड़ी पैकेज की राहत पाने के बाद भी आज गरीब भूखों मर रहा है रोड पर आज भी मजदूरों की यह हालात है कि कोई घर पहुंचने के बाद मरता है कोई घर पहुंचने से पहले ही मर जाता है तो कोई रास्ते में ही मर जाता है। सरकार ने इन गरीबों को इतनी बड़ी राहत पैकेज दी लेकिन फिर भी घर यह नहीं पहुंच पाए। इनकी गलती क्या है भारत के विकास में यह अपनी मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन आज सरकार न ही इन्हे घर पहुंचा पा रही है न ही दो वक्त की रोटी दे पा रही है। ग्रामीण इलाकों में फ्री राशन तो बटवे जाते हैं लेकिन कितनों को मिल पाता है यह बड़ी बात है। आज जिन मजदूरों की वजह से भारत का विकास हुआ आज वही दो वक्त की रोटी के लिए और अपने घर पहुंचने के लिए परेशान हैं। आज जब सरकार की उन बड़े-बड़े दावोंऔर बड़े-बड़े एलान को ढूंढा जाता है तो वह गायब से नजर आते हैं।
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